Thursday, January 24, 2019

मार्क जकरबर्ग ने लेजर गन से मारा बकरा और जैक डॉर्सी को सर्व किया

फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग और ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने एक बार साथ डिनर किया. दिलचस्प ये है कि उन्होंने जैक डॉर्सी को खुद से मारा गया बकरा डिनर के तौर पर सर्व किया. इसे उन्होंने खुद लेजर गन से मारा था. माना जा रहा है कि ये न्यू ईयर चैलेंज के तहत किया गया था. ये सब बातें जैक डॉर्सी ने एक इंटरव्यू में कही हैं.

Twitter फाउंडर जैक डॉर्सी ने एक रोलिंग स्टोन मैगज़ीन को दिए एक इंटरव्यू में ये बात कही है. अब ये साफ नहीं है कि अब भी मार्क जकरबर्ग अपने खाने के लिए जानवरों का शिकार खुद करते हैं ये नहीं. बकरे खिलाने वाली बात जैक डॉर्सी ने खुद एक इंटरव्यू में कहीं हैं.

इंटरव्यू के दौरान जब ट्विटर के बॉस जैक डॉर्सी से ये पूछा गया कि मार्क जकरबर्ग के साथ उनका सबसे यादगार समय कौन सा रहा है. इसके जवाब में जैक डॉर्सी ने कहा, ‘एक साल था जब वो (जकरबर्ग) वही खाते थे जिसे वो खुद से मारते थे. मेरे लिए उन्होंने डिनर में बकरे का मांस सर्व किया. उसे उन्होंने खुद मारा था’

जब डॉर्सी से ये पूछा गया कि क्या उन्होंने जकरबर्ग को बकरा मारते हुए देखा तो उनका जवाब ‘ना’ था. बाद में उन्होंने इसे एक्सप्लेन किया और कहा कि जकरबर्ग ने बकरे को लेज़र गन से मारा था. आगे उन्होंने कहा, ‘नहीं. उन्होंने उसे पहले मारा था. मेरा गेस है कि उन्होंने ही मारा होगा. उन्होंने बकरे को लेजर गन से मारा फिर चाकू यूज किया. फिर उन्होंने इसे बुचर के पास भेज दिया’

जैक डॉर्सी ने इसके बारे में आगे ये भी कहा कि उन्हें लगता है कि पहले स्टन गन से मारा फिर चाकू से काटा और फिर बुचर के पास भेजा गया. जैक डॉर्सी ने इस इंटरव्यू में उस बातचीत के बारे में बताया जो उस डिनर के दौरान हुई .

डॉर्सी ने कहा, ‘क्या हम वो बकरा खा रहे हैं जिसे तुमने मारा है? उन्होंने (जकरबर्ग ने) कहा, हां. ‘मैने कहा, ‘क्या तुनमे इससे पहले बकरे का मांस खाया है?’ उनका कहना था, ‘हां I love it और मुझे ये काफी पंसद है. मैने फिर पूछा, ‘और हम क्या खा रहे हैं? सैलेड? मैने पूछा, ‘बकरा कहां है?  जवाब मिला अवन में है. हमने फिर आधे घंटे का इंतजार किया फिर जकरबर्ग ने कहा है कि अब तैयार हो चुका है डाइनिंग रुम चलते हैं. उसने बकरा रखा, जो ठंडा था. ये काफी यादगार था. मुझे नहीं बता कि उसे अवन में रखा गया या नहीं. मैंने सिर्फ सलाद खाया’

2011 में जब फेसबुक फाउंडर 27 साल के थे तो उन्होंने न्यू ईयर चैलेंज लिया था. इसके तहत उन्होंने कहा था कि मैं वही मीट खाता हूं जिन जानवरों को मैं खुद मारता हूं. इसलिए यह माना जा रहा है कि जैक डॉर्सी ने जो कहा है वो 2011 की बात होगी. 

Wednesday, January 16, 2019

आपके पुराने WhatsApp मैसेज कोई और पढ़ सकता है! खामी या चूक?

पिछले हफ्ते से कुछ यूजर्स सोशल मीडिया पर वॉट्सऐप के पुराने चैट्स खुद से डिलीट होने की बात कर रहे हैं. ऐसा आपके साथ भी हो सकता है. दरअसल एक बग है जो ऐसा कर रहा है. इस मामले पर वॉट्सऐप का ऑफिशियल स्टेटमेंट भी आया है.

WAbetainfo की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ यूजर्स पिछले महीने से इस बग के बारे में बता रहे हैं. उनका कहना है कि पुराने चैट्स खुद से डिलीट हो रहे हैं और फिर इन्हें वो रिट्रीव भी करने में असफल हैं. ऐसे एंड्रॉयड यूजर्स के साथ हो रहा है.

इसके अलावा भी एक समस्या है जिसे ऐमेजॉन वेब सर्विस में काम करने वाली ऐबी फुलर ने ट्वीट किया है. उनके साथ ये प्रॉब्लम हुई है कि उन्हें किसी दूसरे का वॉट्सऐप चैट्स दिख रहे हैं.

एक यूजर ने लिखा है, 'ट्रेंड बदल चुका है हर सुबह मेरे एक या दो चैट हिस्ट्री गायब हो रहे हैं. मैं Moto G4 Plus यूज कर रहा हूं और हाल ही में गूगल सर्च किया है कि और भी भी ऐसी प्रॉब्लम फेस कर रहे हैं'

फेसबुक की कंपनी वॉट्सऐप के एक स्टेटमेंट के मुताबिक कंपनी को इस वॉट्सऐप बग के बारे में जानकारी है और जिन यूजर्स को इसकी वजह से दिक्कत हुई है उनके लिए इसे ठीक किया जाएगा.

एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि वॉट्सऐप में एक नए तरह की दिक्कत आई है. ऐमेजॉन वेब सर्विस के ऐबी फुलर ने दावा किया है कि उनका नंबर पहले जिनके बास था वो उनके चैट्स पढ़े जा सकते थे. ये काफी गंभीर है और प्राइवेसी पर सवाल भी खड़े करता है.

फुलर ने कहा है, 'हां या नया डिवाइस था और ये सेकंड हैंड नहीं था. न ही ये सिम सेकंड हैंड सिम था. मैं श्योर हूं कि ये मेरे मैसेज नहीं थे नही मेरे ग्रुप थे जिनमें मुझे ऐड किया गया. वो प्लेन टेक्स्ट थे. मैं श्योर हूं कि मैने अपना पुराना बैकअप भी रीस्टोर नहीं किया.'

इनके कहने का मतलब ये है कि ये उनके चैट्स नहीं थे, बल्कि जिनके नाम से ये नंबर पहले था वो उनके वॉट्सऐप चैट्स थे.
वॉट्सऐप की इस पॉलिसी पर उठ रहे हैं सवाल

वॉट्सऐप की पॉलिसी में कहा गया है, 'पुराना अकाउंट डिलीट कर लें. अगर नहीं किया है और आपके पास पुराने नंबर का ऐक्सेस नहीं है तो घबराने की कोई बात नहीं है. अगर उस नंबर का नया मालिक नए फोन में उस नंबर से 45 दिन के बाद वॉट्सऐप ऐक्टिविटे करता है तो उस नंबर से जुड़े आपके अकाउंट इनफॉर्मेशन पूरी तरह से डिलीट कर दिए जाएंगे'

उदाहरण के तौर पर आपका नंबर खो गया है और आपने उसी नंबर का सिम न लेकर उसे बंद करा दिया है. तय समय के बाद वो नंबर किसी दूसरे यूजर को दिया जाएगा. जब वो यूजर उस नंबर से वॉट्सऐप ऐक्टिवेट करेगा तो आपके मैसेज उसे दिखेंगे? ये सवाल ऐबी फुलर का भी है जिनके साथे इसी तरह की प्रॉब्लम हुई है.

शीला दीक्षित की पुरानी प्रोफाइल को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें दिल्ली का नेतृत्व सौंपने का फैसला किया है. वह 15 वर्षों तक लगातार मुख्यमंत्री रहीं. इसी दौरान दिल्ली का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलने का श्रेय उन्हें दिया जाता है. अपने प्रशासनिक अनुभव की बदौलत उन्होंने आलाकमान को अपने पर दोबारा भरोसा दिलाया है. क्योंकि उनके कामकाज को लेकर कोई विवाद देखने को नहीं मिलता है. उन्हें एक बेहतर मैनेजर माना जाता है. अपने पुराने तजुर्बों को लेकर कॉन्फिडेंस से भरी नजर आती हैं. ‘आजतक’ के इस सवाल पर वह कहती भी हैं कि, ‘आलाकमान को लगता है कि मुझे दिल्ली का अनुभव है और यही कारण है कि उन्होंने नई दिल्ली कांग्रेस प्रमुख के लिए मुझे चुना.’

बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों का एकजुट होने का क्रम शुरू हो गया है. कांग्रेस महागठबंधन की पूरजोर तरफदारी कर रही है. वह बिहार में महागठबंधन खड़ा कर चुकी है. हालांकि शीला दीक्षित अपनी सियासी रणनीति का खुलासा नहीं कर रही हैं. दिल्ली में कांग्रेस के पास लोकसभा और विधानसभा में एक भी सीट नहीं है. इस स्थिति में अगले चुनाव की रणनीति पर वह कहती हैं कि, ‘दिल्ली में गठबंधन पर चर्चा चल रही है और जब वक्त आएगा तो पता चल जाएगा.’

Monday, January 7, 2019

आलोक वर्मा का पद बरकरार, लेकिन लटकी रहेगी तलवार, पढ़ें फैसले की बड़ी बातें

नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को गरीब सवर्णों को आरक्षण देकर ऐतिहासिक निर्णय किया. लोकसभा चुनाव से ऐन पहले सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में 10 फीसदी आरक्षण दिया गया. विपक्ष ने सरकार के इस फैसले को सिर्फ एक चुनावी दांव बताया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया है. अगर आपके मन में इस फैसले से जुड़े कुछ सवाल हैं तो जवाब आपको यहां मिलेंगे...

देश की सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में चल रहे विवाद पर अपना फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने को गलत करार दिया और उन्हें दोबारा पद पर बहाल कर दिया. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. हालांकि, अभी भी आलोक वर्मा पर लटकी हुई जांच की तलवार बरकरार है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई केस में सुनाए गए फैसले की बड़ी बातें क्या हैं

1.    केंद्र सरकार द्वारा CBI चीफ आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला बिल्कुल गलत. सरकार के पास सीबीआई चीफ को छुट्टी पर भेजे जाने का कोई अधिकार नहीं. दो व्यक्तियों के बीच की लड़ाई के बीच पद की गरिमा रखना काफी जरूरी है.

2.    सिर्फ एक हाई लेवल कमेटी ही इस प्रकार का फैसला ले सकती है. इस कमेटी में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल हैं.

3.    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही आलोक वर्मा दोबारा सीबीआई के चीफ के पद पर तैनात हो जाएंगे, हालांकि वह अपने बचे हुए कार्यकाल में कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले पाएंगे.

4.    आलोक वर्मा पर जो आरोप लगाए गए हैं और उनपर जो भी जांच चल रही है, वह सभी जारी रहेंगे. अगले सात दिनों में हाई लेवल कमेटी (PM, CJI, LoP) इस पर अपना निर्णय सुनाएगी. अगर आलोक वर्मा के खिलाफ किसी एक्शन की जरूरत होती है तो वह यही कमेटी तय करेगी. तब तक आलोक वर्मा कोई बड़ा फैसला नहीं ले पाएंगे.

5.    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही सीबीआई में अब सभी पद पहले की तरह ही हो जाएंगे. यानी आलोक वर्मा सीबीआई चीफ, राकेश अस्थाना सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर, एम. नागेश्वर राव स्पेशल डायरेक्टर के पद पर तैनात होंगे.

आपको बता दें कि बीते साल अक्टूबर में आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच मनमुटाव की बात सामने आई थी. जिसके बाद केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था, इसी फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट में गए थे. आलोक वर्मा 1 फरवरी, 2017 को सीबीआई के चीफ बने थे.