खेल डेस्क. ऑस्ट्रेलिया के एरॉन फिंच वनडे और टी-20 इंटरनेशनल में 150 से ज्यादा का स्कोर करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने शारजाह में रविवार रात पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए वनडे में यह उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने मैच में 11 चौके और 6 छक्के की मदद से 143 गेंद पर नाबाद 153 रन बनाए।
फिंच की पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने मैच में पाकिस्तान को 8 विकेट से हरा दिया। इस मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया। उसने 50 ओवर में 7 विकेट पर 284 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने 47.5 ओवर में 2 विकेट पर 285 रन बनाकर मैच जीत लिया।
फिंच ने टी-20 इंटरनेशनल में 2 बार 150+ का स्कोर किया
ऑस्ट्रेलिया के वनडे और टी-20 टीम के कप्तान फिंच टी-20 इंटरनेशनल में दो बार 150 से ज्यादा का स्कोर बना चुके हैं। उन्होंने पिछले साल 3 जुलाई को हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 इंटरनेशनल में 172 और 29 अगस्त 2013 को साउथैम्पटन में इंग्लैंड के खिलाफ 156 रन बनाए थे।
टी-20 इंटरनेशनल में 2 बल्लेबाज ही बना पाए हैं 150+ का स्कोर
फिंच के अलावा टी-20 इंटरनेशनल में अफगानिस्तान के हजरतउल्ला जजाई ही 150 से ज्यादा का स्कोर बना पाए हैं। जजाई ने इस साल 23 फरवरी को देहरादून में ऑयरलैंड के खिलाफ सीरीज के दूसरे टी-20 में 162 रन की नाबाद पारी खेली थी। हालांकि, वनडे इंटरनेशनल में उनका हाइएस्ट स्कोर 67 रन ही है।
फिंच एशिया में लगातार 2 वनडे शतक लगाने वाले दूसरे ऑस्ट्रेलियाई
फिंच ऑस्ट्रेलिया के ऐसे दूसरे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने एशिया में खेले गए वनडे इंटरनेशनल मैच में एक के बाद एक शतक लगाया है। उनसे पहले मार्क वॉ यह उपलब्धि अपने नाम कर चुके हैं। मार्क ने 1996 में वनडे वर्ल्ड कप के दौरान केन्या और भारत के खिलाफ खेले गए लगातार मुकाबलों में शतक लगाए थे।
2013 में मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने का फैसला किया गया था। इसी साल छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली विधानसभा चुनाव में पहली बार नोटा का विकल्प दिया गया। अब तक एक लोकसभा और कुल 37 विधानसभा चुनावों में नोटा का इस्तेमाल किया जा चुका है। 2013 से 2017 के बीच हुए चुनावों में नोटा को कुल 1.33 करोड़ वोट मिले।
नोटा को सबसे ज्यादा वोट, तब भी दूसरे नंबर वाला प्रत्याशी माना जाता है विजेता
नोटा को मिले वोटों को रद्द माना जाता है। यानी इसका चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता। उदाहरण के तौर पर अगर किसी चुनाव में एक प्रत्याशी को 40 और दूसरे प्रत्याशी को 30 वोट मिले और नोटा को सबसे ज्यादा 100 वोट मिले, तो ऐसी स्थिति में भी नोटा के बाद सबसे अधिक वोट पाने वाले प्रत्याशी को विजय घोषित किया जाता है।
महाराष्ट्र और हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने पिछले साल लिए थे बड़े फैसले
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने नवंबर 2018 में नोटा को ज्यादा वोट मिलने की स्थिति में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को फिर से कराए जाने का फैसला लिया था। आयोग ने नोटा को एक प्रत्याशी की तरह गिनने का फैसला किया था और इसे सबसे ज्यादा वोट मिलने पर सभी प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित करने की बात कही थी। नवंबर में ही हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने भी इसी तर्ज पर पांच जिलों में होने वाले नगर निगम चुनाव में नोटा को ज्यादा वोट मिलने की स्थिति में दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया था।
Monday, March 25, 2019
Monday, March 18, 2019
पर्रिकर पंचतत्व में विलीन, मोदी-शाह-राजनाथ समेत कई बड़े नेताओं ने दी विदाई
पणजी. गोवा के मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रिकर (63) को सोमवार को यहां के एसएजी मैदान में बड़े बेटे उत्पल पर्रिकर ने मुखाग्नि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें विदाई दी। रविवार शाम 6.40 बजे पर्रिकर का उनके घर पर निधन हो गया था। पर्रिकर का एक साल से पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज चल रहा था।
अंतिम दर्शन के लिए सोमवार सुबह उनकी पार्थिव देह घर से भाजपा कार्यालय से लाई गई थी। इसके बाद इसे कला अकादमी में भी कुछ देर रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा पहुंचकर पर्रिकर को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने पर्रिकर के निधन के बाद रविवार रात ट्वीट किया, 'पर्रिकर आधुनिक गोवा के निर्माता थे, उनके फैसलों ने भारतीय रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया। उनके फैसलों ने भारतीय रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया।'
मुख्यमंत्री बनने वाले पहले आईआईटीयन थे पर्रिकर
13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा में जन्में पर्रिकर पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जो आईआईटी से पासआउट थे। वे 2000-2002, 2002-05, 2012-2014 और 14 मार्च 2017-17 मार्च 2019 तक चार बार मुख्यमंत्री रहे। 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे गोवा की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति में आएं। इसके बाद पर्रिकर को रक्षामंत्री बनाया गया था।
पत्नी का भी कैंसर से निधन हुआ था
पर्रिकर की पत्नी मेधा का 2001 में कैंसर से निधन हो गया था। उनके दो बेटे उत्पल और अभिजात हैं। उत्पल ने अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अभिजात कारोबारी हैं।
पद पर रहते हुए दिवंगत होने वाले देश के 18वें मुख्यमंत्री
पर्रिकर देश के 18वें ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिनका पद पर रहते हुए निधन हुआ। उनसे पहले तमिलनाडु की सीएम जयललिता, जम्मू-कश्मीर के शेख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सईद, आंध्रप्रदेश के वाईएस राजशेखर रेड्डी का निधन भी पद पर रहते हुए ही हुआ था। इनके अलावा गोपीनाथ बोरदोलोई (असम), रविशंकर शुक्ल (मध्यप्रदेश), श्रीकृष्ण सिंह (बिहार), बिधानचंद्र राय (प.बंगाल), मरुतराव कन्नमवार (महाराष्ट्र), बलवंत राय मेहता (गुजरात), सीएन अन्नादुरई (तमिलनाडु), दयानंद बंडोडकर (गोवा), बरकतुल्ला खान (राजस्थान), एमजी रामचंद्रन (तमिलनाडु), चिमनभाई पटेल (गुजरात), बेअंत सिंह (पंजाब) और दोरजी खांडू (अरुणाचल प्रदेश) का निधन भी पद पर रहते ही हुआ।
मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के अंतिम संस्कार से पहले ही गोवा में सियासी घमासान शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी में जहां नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन चल रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार बनाने का दावा लेकर राजभवन पहुंच गई है. इस बीच नितिन गडकरी ने कहा कि मैं शाम 6 बजे दिल्ली वापस जा रहा हूं, इससे पहले ही मुख्यमंत्री पद के लिए फैसला लिया जाए तो अच्छा है. गडकरी ने कहा कि सीएम बीजेपी का ही होगा, हम सहयोगियों के संपर्क में हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस के सभी 14 विधायकों राजभवन जाकर राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मुलाकात की. राजभवन से बाहर आकर नेता विपक्ष और कांग्रेस विधायक चंद्रकांत कावलेकर ने बताया कि हमने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है, क्योंकि कांग्रेस सबसे बड़ा दल है. चंद्रकांत ने बताया कि हमने राज्यपाल से सरकार बनाने का निमंत्रण देने की मांग करते हुए अपना बहुमत साबित करने के लिए कहा है.
बता दें कि रविवार शाम गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का देहांत होने के बाद से ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी गोवा में डटे हुए हैं. वो लगातार विधायकों से बैठकें कर रहे हैं. एमजीपी के तीन विधायकों से गडकरी की मीटिंग हुई है. बताया जा रहा है कि एमजीपी हाईकमान में चर्चा के बाद दोपहर करीब 3 बजे पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. सूत्रों के मुताबकि, बीजेपी की तरफ से गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत राज्य के नए मुख्यमंत्री हो सकते हैं.
अंतिम दर्शन के लिए सोमवार सुबह उनकी पार्थिव देह घर से भाजपा कार्यालय से लाई गई थी। इसके बाद इसे कला अकादमी में भी कुछ देर रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा पहुंचकर पर्रिकर को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने पर्रिकर के निधन के बाद रविवार रात ट्वीट किया, 'पर्रिकर आधुनिक गोवा के निर्माता थे, उनके फैसलों ने भारतीय रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया। उनके फैसलों ने भारतीय रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया।'
मुख्यमंत्री बनने वाले पहले आईआईटीयन थे पर्रिकर
13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा में जन्में पर्रिकर पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जो आईआईटी से पासआउट थे। वे 2000-2002, 2002-05, 2012-2014 और 14 मार्च 2017-17 मार्च 2019 तक चार बार मुख्यमंत्री रहे। 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे गोवा की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति में आएं। इसके बाद पर्रिकर को रक्षामंत्री बनाया गया था।
पत्नी का भी कैंसर से निधन हुआ था
पर्रिकर की पत्नी मेधा का 2001 में कैंसर से निधन हो गया था। उनके दो बेटे उत्पल और अभिजात हैं। उत्पल ने अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अभिजात कारोबारी हैं।
पद पर रहते हुए दिवंगत होने वाले देश के 18वें मुख्यमंत्री
पर्रिकर देश के 18वें ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिनका पद पर रहते हुए निधन हुआ। उनसे पहले तमिलनाडु की सीएम जयललिता, जम्मू-कश्मीर के शेख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सईद, आंध्रप्रदेश के वाईएस राजशेखर रेड्डी का निधन भी पद पर रहते हुए ही हुआ था। इनके अलावा गोपीनाथ बोरदोलोई (असम), रविशंकर शुक्ल (मध्यप्रदेश), श्रीकृष्ण सिंह (बिहार), बिधानचंद्र राय (प.बंगाल), मरुतराव कन्नमवार (महाराष्ट्र), बलवंत राय मेहता (गुजरात), सीएन अन्नादुरई (तमिलनाडु), दयानंद बंडोडकर (गोवा), बरकतुल्ला खान (राजस्थान), एमजी रामचंद्रन (तमिलनाडु), चिमनभाई पटेल (गुजरात), बेअंत सिंह (पंजाब) और दोरजी खांडू (अरुणाचल प्रदेश) का निधन भी पद पर रहते ही हुआ।
मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के अंतिम संस्कार से पहले ही गोवा में सियासी घमासान शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी में जहां नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन चल रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार बनाने का दावा लेकर राजभवन पहुंच गई है. इस बीच नितिन गडकरी ने कहा कि मैं शाम 6 बजे दिल्ली वापस जा रहा हूं, इससे पहले ही मुख्यमंत्री पद के लिए फैसला लिया जाए तो अच्छा है. गडकरी ने कहा कि सीएम बीजेपी का ही होगा, हम सहयोगियों के संपर्क में हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस के सभी 14 विधायकों राजभवन जाकर राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मुलाकात की. राजभवन से बाहर आकर नेता विपक्ष और कांग्रेस विधायक चंद्रकांत कावलेकर ने बताया कि हमने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है, क्योंकि कांग्रेस सबसे बड़ा दल है. चंद्रकांत ने बताया कि हमने राज्यपाल से सरकार बनाने का निमंत्रण देने की मांग करते हुए अपना बहुमत साबित करने के लिए कहा है.
बता दें कि रविवार शाम गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का देहांत होने के बाद से ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी गोवा में डटे हुए हैं. वो लगातार विधायकों से बैठकें कर रहे हैं. एमजीपी के तीन विधायकों से गडकरी की मीटिंग हुई है. बताया जा रहा है कि एमजीपी हाईकमान में चर्चा के बाद दोपहर करीब 3 बजे पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. सूत्रों के मुताबकि, बीजेपी की तरफ से गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत राज्य के नए मुख्यमंत्री हो सकते हैं.
Friday, March 15, 2019
4 बड़े चेहरे इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे, 5 दशक तक सक्रिय रहे सुषमा-पासवान मैदान में नहीं
नई दिल्ली. इस बार लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति के कुछ बड़े चेहरे नजर नहीं आएंगे। राकांपा प्रमुख शरद पवार के चुनाव लड़ने की अटकलें थीं, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। वहीं, रामविलास पासवान, सुषमा स्वराज, उमा भारती जैसे नेता भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक के लिए यह पहला चुनाव होगा। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस है।
बड़े नेता जो इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे
1) 14 लोकसभा चुनाव लड़ चुके शरद पवार बोले- अब नहीं
चुनावी राजनीति में कब से : पवार ने पहली बार 1967 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। वे तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने केन्द्र सरकार में रक्षा और कृषि विभाग जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली।
चर्चा में क्यों रहे : शरद पवार 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बेटी सुप्रिया सुले के लिए छोड़ी। पवार अभी राज्यसभा सदस्य हैं। इस बार उनके माढा से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : पवार ने कहा कि परिवार के दो सदस्य यानी सुप्रिया सुले और अजीत पवार के बेटे पार्थ इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यही कारण है कि वे इस बार चुनाव मैदान में नहीं होंगे। उन्होंने कहा था कि परिवार और पार्टी के सदस्य चाहते हैं कि पार्थ (पोता) चुनाव लड़े। मैं भी चाहता हूं कि नई पीढ़ी को राजनीति में आना चाहिए।
2) स्वास्थ्य कारणों के चलते सुषमा ने बनाई चुनाव से दूरी
चुनावी राजनीति में कब से : सुषमा स्वराज 1977 में पहली बार हरियाणा विधानसभा के लिए चुनीं गईं। वे तीन बार विधायक रहीं। चार बार लोकसभा सदस्य बनीं। तीन बार राज्यसभा सदस्य रहीं। इस दौरान वे राज्य और केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहीं। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं।
चर्चा में क्यों रहीं : सुषमा हरियाणा सरकार में 25 साल की उम्र में मंत्री बनीं। किसी भी राज्य में सबसे युवा मंत्री बनने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। सुषमा 6 राज्यों हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : सुषमा ने कहा था कि डॉक्टरों ने उन्हें इन्फेक्शन के चलते धूल से दूर रहने की हिदायत दी है। इसलिए वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकतीं, लेकिन वे राजनीति में बनी रहेंगी।
3) 50 साल में पहली बार चुनाव नहीं लड़ेंगे रामविलास पासवान
चुनावी राजनीति में कब से : पासवान पहली बार 1969 में विधायक बने। इसके बाद 1977 में वे पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। आठ बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद चुने गए। इन दौरान वे कभी यूपीए तो कभी एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।
चर्चा में क्यों रहे : लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक हैं। पिछले 50 सालों से केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं। वे गुजराल, देवेगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन और मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री बने।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण :पासवान ने इस साल जनवरी में ऐलान किया था कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया था।
4) 'राम' और 'गंगा' के लिए उमा भारती ने छोड़ा चुनावी मैदान
चुनावी राजनीति में कब से : उमा भारती 1989 में पहली बार खजुराहो सीट से लोकसभा सदस्य चुनी गईं। वे अटल और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं। मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री भी रहीं। 2014 में झांसी से लोकसभा सदस्य बनीं।
चर्चा में क्यों रहीं : उमा भारती राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रमुख नेता रहीं। बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान भी वे अयोध्या में मौजूद थीं। मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के दौरान एक मामले में गिरफ्तारी वॉरंट निकलने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से विवाद के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। जून 2011 में उनकी पार्टी में वापसी हुई। वे केंद्रीय मंत्री हैं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : उमा भारती ने कहा था कि वे अब सिर्फ भगवान राम और गंगा के लिए काम करेंगी और पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करती रहेंगी।
5) कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी नहीं लड़ेंगे चुनाव
चुनावी राजनीति में कब से : वेणुगोपाल 1996 में केरल की अलप्पुजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वे ओमान चांडी सरकार में मंत्री और यूपीए-2 में राज्य मंत्री रह चुके हैं।
चर्चा में क्यों रहे: सिविल एविएशन में राज्य मंत्री रहने के दौरान 2013 में वेणुगोपाल ने एयर इंडिया में टिकट स्कैम का पता लगाया था। उन्होंने फ्लाइट में अपनी यात्रा के दौरान इस स्कैम को पकड़ा था। उनके पास अभी कांग्रेस में संगठन महासचिव का महत्वपूर्ण पद है।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : वेणुगोपाल का कहना है कि उन पर पार्टी संगठन की जिम्मेदारी है। वे कर्नाटक के प्रभारी भी हैं। इसी के चलते वे चुनाव न लड़ते हुए पार्टी के लिए काम करेंगे।
चुनाव प्रचार में नजर नहीं आएंगे लालू
चुनावी राजनीति में कब से : लालू यादव 1977 में छपरा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। यूपीए सरकार (2004-09) में रेल मंत्री रहे।
चर्चा में क्यों रहे : लालू प्रसाद अपने मजाकिया भाषणों के लिए जाने जाते हैं। इमरजेंसी के दौर के बाद बिहार में हुए हर चुनाव में वे सक्रिय रहे हैं।
चुनाव प्रचार से दूरी का कारण : लालू चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता कैदी हैं। इसके चलते वे चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। फिलहाल रांची रिम्स में उनका इलाज चल रहा है।
दशकों के बाद दक्षिण भारत के दो दिग्गजों के बिना होंगे चुनाव
तमिलनाडु की राजनीति में यह पहला मौका होगा जब दो बड़े चेहरे अन्नाद्रमुक की जयललिता और द्रमुक के करुणानिधि नहीं होंगे। जयललिता का 2016 और करुणानिधि का 2018 में निधन हो गया था।
‘द्रविड़ योद्धा’ के रूप में पहचाने जाने वाले करुणानिधि ने पहला विधानसभा चुनाव 1957 में लड़ा। वे 13 बार विधायक बने। 61 साल के अपने राजनीतिक करियर में वे कभी चुनाव नहीं हारे। 1969 में वे पहली बार राज्य के सीएम बने। इसके बाद पांच बार सीएम रहे। वे पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने तमिलनाडु में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई थी।
तमिलनाडु में 'अम्मा' के रूप में लोकप्रिय जयललिता ने एमजी रामचंद्रन के नेतृत्व में पहली बार 1982 में राजनीति में कदम रखा। 1991 में पहली बार वे मुख्यमंत्री बनीं। 6 बार राज्य की सीएम रहीं। पिछले लोकसभा चुनाव में जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने राज्य की 39 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
दोनों दिग्गजों की अनुपस्थिति में अन्नाद्रमुक ने जहां भाजपा और दो अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, वहीं द्रमुक ने कांग्रेस से गठबंधन किया है।
बड़े नेता जो इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे
1) 14 लोकसभा चुनाव लड़ चुके शरद पवार बोले- अब नहीं
चुनावी राजनीति में कब से : पवार ने पहली बार 1967 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। वे तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने केन्द्र सरकार में रक्षा और कृषि विभाग जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली।
चर्चा में क्यों रहे : शरद पवार 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बेटी सुप्रिया सुले के लिए छोड़ी। पवार अभी राज्यसभा सदस्य हैं। इस बार उनके माढा से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : पवार ने कहा कि परिवार के दो सदस्य यानी सुप्रिया सुले और अजीत पवार के बेटे पार्थ इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यही कारण है कि वे इस बार चुनाव मैदान में नहीं होंगे। उन्होंने कहा था कि परिवार और पार्टी के सदस्य चाहते हैं कि पार्थ (पोता) चुनाव लड़े। मैं भी चाहता हूं कि नई पीढ़ी को राजनीति में आना चाहिए।
2) स्वास्थ्य कारणों के चलते सुषमा ने बनाई चुनाव से दूरी
चुनावी राजनीति में कब से : सुषमा स्वराज 1977 में पहली बार हरियाणा विधानसभा के लिए चुनीं गईं। वे तीन बार विधायक रहीं। चार बार लोकसभा सदस्य बनीं। तीन बार राज्यसभा सदस्य रहीं। इस दौरान वे राज्य और केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहीं। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं।
चर्चा में क्यों रहीं : सुषमा हरियाणा सरकार में 25 साल की उम्र में मंत्री बनीं। किसी भी राज्य में सबसे युवा मंत्री बनने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। सुषमा 6 राज्यों हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : सुषमा ने कहा था कि डॉक्टरों ने उन्हें इन्फेक्शन के चलते धूल से दूर रहने की हिदायत दी है। इसलिए वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकतीं, लेकिन वे राजनीति में बनी रहेंगी।
3) 50 साल में पहली बार चुनाव नहीं लड़ेंगे रामविलास पासवान
चुनावी राजनीति में कब से : पासवान पहली बार 1969 में विधायक बने। इसके बाद 1977 में वे पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। आठ बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद चुने गए। इन दौरान वे कभी यूपीए तो कभी एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।
चर्चा में क्यों रहे : लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक हैं। पिछले 50 सालों से केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं। वे गुजराल, देवेगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन और मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री बने।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण :पासवान ने इस साल जनवरी में ऐलान किया था कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया था।
4) 'राम' और 'गंगा' के लिए उमा भारती ने छोड़ा चुनावी मैदान
चुनावी राजनीति में कब से : उमा भारती 1989 में पहली बार खजुराहो सीट से लोकसभा सदस्य चुनी गईं। वे अटल और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं। मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री भी रहीं। 2014 में झांसी से लोकसभा सदस्य बनीं।
चर्चा में क्यों रहीं : उमा भारती राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रमुख नेता रहीं। बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान भी वे अयोध्या में मौजूद थीं। मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के दौरान एक मामले में गिरफ्तारी वॉरंट निकलने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से विवाद के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। जून 2011 में उनकी पार्टी में वापसी हुई। वे केंद्रीय मंत्री हैं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : उमा भारती ने कहा था कि वे अब सिर्फ भगवान राम और गंगा के लिए काम करेंगी और पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करती रहेंगी।
5) कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी नहीं लड़ेंगे चुनाव
चुनावी राजनीति में कब से : वेणुगोपाल 1996 में केरल की अलप्पुजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वे ओमान चांडी सरकार में मंत्री और यूपीए-2 में राज्य मंत्री रह चुके हैं।
चर्चा में क्यों रहे: सिविल एविएशन में राज्य मंत्री रहने के दौरान 2013 में वेणुगोपाल ने एयर इंडिया में टिकट स्कैम का पता लगाया था। उन्होंने फ्लाइट में अपनी यात्रा के दौरान इस स्कैम को पकड़ा था। उनके पास अभी कांग्रेस में संगठन महासचिव का महत्वपूर्ण पद है।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण : वेणुगोपाल का कहना है कि उन पर पार्टी संगठन की जिम्मेदारी है। वे कर्नाटक के प्रभारी भी हैं। इसी के चलते वे चुनाव न लड़ते हुए पार्टी के लिए काम करेंगे।
चुनाव प्रचार में नजर नहीं आएंगे लालू
चुनावी राजनीति में कब से : लालू यादव 1977 में छपरा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। यूपीए सरकार (2004-09) में रेल मंत्री रहे।
चर्चा में क्यों रहे : लालू प्रसाद अपने मजाकिया भाषणों के लिए जाने जाते हैं। इमरजेंसी के दौर के बाद बिहार में हुए हर चुनाव में वे सक्रिय रहे हैं।
चुनाव प्रचार से दूरी का कारण : लालू चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता कैदी हैं। इसके चलते वे चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। फिलहाल रांची रिम्स में उनका इलाज चल रहा है।
दशकों के बाद दक्षिण भारत के दो दिग्गजों के बिना होंगे चुनाव
तमिलनाडु की राजनीति में यह पहला मौका होगा जब दो बड़े चेहरे अन्नाद्रमुक की जयललिता और द्रमुक के करुणानिधि नहीं होंगे। जयललिता का 2016 और करुणानिधि का 2018 में निधन हो गया था।
‘द्रविड़ योद्धा’ के रूप में पहचाने जाने वाले करुणानिधि ने पहला विधानसभा चुनाव 1957 में लड़ा। वे 13 बार विधायक बने। 61 साल के अपने राजनीतिक करियर में वे कभी चुनाव नहीं हारे। 1969 में वे पहली बार राज्य के सीएम बने। इसके बाद पांच बार सीएम रहे। वे पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने तमिलनाडु में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई थी।
तमिलनाडु में 'अम्मा' के रूप में लोकप्रिय जयललिता ने एमजी रामचंद्रन के नेतृत्व में पहली बार 1982 में राजनीति में कदम रखा। 1991 में पहली बार वे मुख्यमंत्री बनीं। 6 बार राज्य की सीएम रहीं। पिछले लोकसभा चुनाव में जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने राज्य की 39 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
दोनों दिग्गजों की अनुपस्थिति में अन्नाद्रमुक ने जहां भाजपा और दो अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, वहीं द्रमुक ने कांग्रेस से गठबंधन किया है।
Monday, March 11, 2019
14 मार्च को फैसला सुनाएगी विशेष अदालत, असीमानंद है मुख्य आरोपी
पंचकूला. पानीपत के दीवाना स्टेशन के नजदीक 12 साल पहले हुए समझौता ट्रेन ब्लास्ट मामले में पंचकूला की विशेष एनआईए कोर्ट 14 मार्च को फैसला सुनाएगी। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 6 मार्च को इस केस की सुनवाई पूरी हो गई थी। मामले में मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंद्र चौधरी है। हालांकि कुल 8 आरोपी थे, जिनमें से 1 की मौत हो चुकी है, जबकि तीन को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
दिल्ली से लाहौर जा रही थी समझौता एक्सप्रेस
दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास धमाका हुआ था। इस धमाके में दो बोगियों में आग लग गई थी, जिसमें 68 लोग जिंदा जल गए थे। मरने वालों में ज्यादातार पाकिस्तान के रहने वाले थे।
पुलिस को घटनास्थल से दो सूटकेस बम मिले, जो फट नहीं पाए थे। 20 फरवरी, 2007 को प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने दो संदिग्धों के स्केच जारी किए। ऐसा कहा गया कि ये दोनों लोग ट्रेन में दिल्ली से सवार हुए थे और रास्ते में कहीं उतर गए। इसके बाद धमाका हुआ।
15 मार्च 2007 को हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। यह इन धमाकों के सिलसिले में की गई पहली गिरफ्तारी थी। पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी। ये कवर इंदौर के एक बाजार से घटना के चंद दिनों पहले ही खरीदे गए थे।
26 जुलाई 2010 को मामला एनआइए को सौंपा गया था। इसके बाद स्वामी असीमानंद को मामले में आरोपी बनाया गया। एनआइए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था। आरोपियों पर आईपीसी की धारा (120 रीड विद 302) 120बी साजिश रचने के साथ 302 हत्या, 307 हत्या की कोशिश करना समेत, विस्फोटक पदार्थ लाने, रेलवे को हुए नुकसान को लेकर कई धाराएं लगाई गई।
एनआइए ने मामले में कुल 224 गवाहों को पेश किया, जबकि बचाव पक्ष ने कोई गवाह नहीं पेश किया। केवल अपने दस्तावेज और कई फैसलों की कॉपी ही कोर्ट में पेश की। इस मामले में कोर्ट की ओर से पाकिस्तानी गवाहों को पेश होने के लिए कई बार मौका दिया गया, लेकिन वह एक बार भी कोर्ट में नहीं आए।
दिल्ली से लाहौर जा रही थी समझौता एक्सप्रेस
दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास धमाका हुआ था। इस धमाके में दो बोगियों में आग लग गई थी, जिसमें 68 लोग जिंदा जल गए थे। मरने वालों में ज्यादातार पाकिस्तान के रहने वाले थे।
पुलिस को घटनास्थल से दो सूटकेस बम मिले, जो फट नहीं पाए थे। 20 फरवरी, 2007 को प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने दो संदिग्धों के स्केच जारी किए। ऐसा कहा गया कि ये दोनों लोग ट्रेन में दिल्ली से सवार हुए थे और रास्ते में कहीं उतर गए। इसके बाद धमाका हुआ।
15 मार्च 2007 को हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। यह इन धमाकों के सिलसिले में की गई पहली गिरफ्तारी थी। पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी। ये कवर इंदौर के एक बाजार से घटना के चंद दिनों पहले ही खरीदे गए थे।
26 जुलाई 2010 को मामला एनआइए को सौंपा गया था। इसके बाद स्वामी असीमानंद को मामले में आरोपी बनाया गया। एनआइए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था। आरोपियों पर आईपीसी की धारा (120 रीड विद 302) 120बी साजिश रचने के साथ 302 हत्या, 307 हत्या की कोशिश करना समेत, विस्फोटक पदार्थ लाने, रेलवे को हुए नुकसान को लेकर कई धाराएं लगाई गई।
एनआइए ने मामले में कुल 224 गवाहों को पेश किया, जबकि बचाव पक्ष ने कोई गवाह नहीं पेश किया। केवल अपने दस्तावेज और कई फैसलों की कॉपी ही कोर्ट में पेश की। इस मामले में कोर्ट की ओर से पाकिस्तानी गवाहों को पेश होने के लिए कई बार मौका दिया गया, लेकिन वह एक बार भी कोर्ट में नहीं आए।
Tuesday, March 5, 2019
दिग्विजय ने आतंकी हमले को दुर्घटना बताया, भाजपा ने कहा- कांग्रेस नेताओं की मानसिकता देश विरोधी
नई दिल्ली. पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर वायुसेना की कार्रवाई के सबूत मांगने के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पुलवामा हमले को 'दुर्घटना' बताया। इस पर भाजपा ने आपत्ति जताई। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, पुलवामा हमले में आतंकवादियों ने हमारे जवानों की नृशंस हत्या की। दिग्विजय आतंकी हमले को घटना बता रहे हैं, उनसे आप क्या उम्मीद करेंगे। ये वही हैं, जो जाकिर नाइक को मानवता की मूर्ति बताते हैं। ये वही हैं जो ओसामाजी और हाफिज सईद साहब कहते हैं।
प्रसाद ने कहा, ''राजनीति करने वालों को इतनी भी तमीज नहीं है कि जवानों की हत्या पर इस तरह से बयान न दें। दिल्ली में बाटला हाउस में दिल्ली के जवान मोहन शर्मा को मारा गया था। दिग्विजय आजमगढ़ गए थे और कहा था कि आतंकवादियों को सिर में गोली लगी थी। कांग्रेस के 10 साल मुख्यमंत्री गए हैं, वह इस तरह के सवाल कर रहे हैं तो क्या कहा जाए?''
विपक्ष की बैठक पाक मीडिया मेंं हैडलाइन बनती है- भाजपा
रविशंकर प्रसाद ने कहा, ''ये किस षडयंत्र के तहत हो रहा है। जो भी यहां कहा जा रहा है, वह पाकिस्तान में दिखाया जा रहा है। ऑल पार्टी मीटिंग का प्रस्ताव पाकिस्तान रेडियो और पाकिस्तान टीवी पर हेडलाइन बनता है।'' वहीं, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने दिग्विजय से पूछा कि क्या राजीव गांधी की हत्या दुर्घटना थी या आतंकी हमला।
वायुसेना के शौर्य पर सबूत मांग रहे सिब्बल- प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने कहा, "कपिल सिब्बल का ट्वीट देख रहा था। ये 10 साल केंद्रीय मंत्री थे। नामी-गिरामी वकील हैं। लंदन में भारत की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। भारत की वायुसेना के शौर्य पर सबूत मांग रहे हैं। तीसरे चिदंबरम साहब हैं। 10 साल वह भी केंद्रीय मंत्री रहे हैं। निजी परेशानी में हैं तो उन्हें ज्यादा नहीं कहूंगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के वाइस एयरमार्शल ने हताहतों पर कुछ नहीं कहा। भारतीय अधिकारियों ने हताहतों की संख्या नहीं बताई। तो ढाई सौ लोगों का आंकड़ा कहां से आया। शहीदों के पिता कहते हैं कि एक बेटा और होगा तो हम सरहद पर भेजेंगे। और कपिल सिब्बल को भारत की शौर्य, वायुसेना पर विश्वास नहीं है।''
'हमारी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न'
दिग्विजय ने ट्वीट किया, ''एयर स्ट्राइक पर विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।'' पहले उन्होंने ने कहा था कि तकनीक के दौर में किसी कार्रवाई की तस्वीरें सैटेलाइट से मिल सकती हैं। लिहाजा सरकार को सबूत देना चाहिए। अमेरिका ने लादेन को मारने का सबूत पेश किया था।
मंगलवार को सिंह ने ट्वीट में लिखा, ''प्रधानमंत्री जी आपकी सरकार के कुछ मंत्री कहते हैं 300 आतंकवादी मारे गए, भाजपा अध्यक्ष कहते हैं 250 मारे हैं। योगी आदित्यनाथ कहते हैं 400 मारे गए और आपके मंत्री एएस अहलुवालिया कहते हैं कि एक भी नहीं मरा। आप इस पर मौन हैं। देश जानना चाहता है कि इनमें झूठा कौन है।''
'250 लोग सिर्फ बालाकोट में मरे'
सिंह ने कहा, "एयर स्ट्राइक में हमारी तरफ से 250 मौतों की बात कही जा रही है, वे सिर्फ बालाकोट में ही मारे गए। इसमें कहीं और के आंकड़े शामिल नहीं हैं। टारगेट का चुनाव सावधानी से किया गया था ताकि सिविलियंस की जान न जाए।"
वहीं मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "कांग्रेस को हो क्या गया है। देश की जनभावना से एकदम उल्टी बात करते हैं। सेना की जानकारी को झुठला रहे हैं। ऐसा किसी और लोकतंत्र देश में नहीं होता, जहां सेना पर ही अविश्वास किया जाता हो।"
कितने मरे गिनती करना सरकार का काम: धनोआ
वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने सोमवार को कहा था कि अगर भारत ने जंगलों ने बम गिराए तो पाक की तरफ से हमला क्यों किया गया? हमले में कितने लोग मारे गए, यह पता करना वायुसेना का काम नहीं। यह सरकार काम है। हमने अपने लक्ष्य पर निशाना साधा। हमने मारे गए लोगों की नहीं बल्कि कितने निशाने लगाए, इसकी गिनती की।
अभिनंदन की रिहाई पर पाक सरकार को शुक्रिया कहा
विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की रिहाई के लिए दिग्विजय ने रविवार को पाक सरकार का शुक्रिया अदा किया था। उन्होंने कहा कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने अभिनंदन की रिहाई का फैसला करके दिखाया कि वे एक अच्छे पड़ोसी हैं। अब उन्हें (इमरान) आतंकी हाफिज सईद और मसूद अजहर को हमें सौंपकर बहादुरी दिखानी चाहिए। मोदी ने कन्याकुमारी में कहा था कि 26/11 के मुंबई हमले (2008) के बाद वायुसेना पाक में सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहती थी लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने ऐसा करने से रोक दिया था। इस पर दिग्विजय ने कहा, "मैंने मोदी जैसा झूठा व्यक्ति नहीं देखा।"
वायुसेना ने जैश के आतंकी कैम्प तबाह किए थे
पुलवामा हमले के 13वें दिन वायुसेना के मिराज-2000 विमानों ने बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी में जैश-ए-मोहम्मद के कैम्प तबाह किए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्रवाई में 350 आतंकी मारे गए थे। इसके अगले दिन 27 फरवरी को पाक के विमान भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में मिग-21 ने पाक के एफ-16 को मार गिराया था। पायलट अभिनंदन को पाक सेना ने बंदी बना लिया था।
स्ट्राइक से पहले कैम्प में 300 मोबाइल एक्टिव थे
न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, बालाकोट में एयर स्ट्राइक से पहले जैश के ठिकाने पर 300 मोबाइल फोन एक्टिव थे। इसकी जानकारी नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने सेना को दी थी। इस पर सुरक्षा एजेंसियों ने भी सहमति जताई थी। इस बात के साफ संकेत मिले थे कि कैम्प में करीब 300 लोग मौजूद हैं।
जैश के मदरसे की 4 इमारतों को निशाना बनाया था
मीडिया रिपोर्ट में एक अफसर ने कहा था- "इंटेलिजेंस एजेंसियों के पास सिंथेटिक एपरचर रडार (एसएआर) की तस्वीरें हैं। इसमें दिखाया गया है कि 4 इमारतों को निशाना बनाया गया। मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने पांच एस-2000 प्रीसीशन-गाइडेड म्यूनिशन (पीजीएम) दागे।" पीजीएम एक स्मार्ट बम होता है जो खास निशाने पर दागा जाता है। भारत ने पीजीएम इजरायल से लिए थे।
प्रसाद ने कहा, ''राजनीति करने वालों को इतनी भी तमीज नहीं है कि जवानों की हत्या पर इस तरह से बयान न दें। दिल्ली में बाटला हाउस में दिल्ली के जवान मोहन शर्मा को मारा गया था। दिग्विजय आजमगढ़ गए थे और कहा था कि आतंकवादियों को सिर में गोली लगी थी। कांग्रेस के 10 साल मुख्यमंत्री गए हैं, वह इस तरह के सवाल कर रहे हैं तो क्या कहा जाए?''
विपक्ष की बैठक पाक मीडिया मेंं हैडलाइन बनती है- भाजपा
रविशंकर प्रसाद ने कहा, ''ये किस षडयंत्र के तहत हो रहा है। जो भी यहां कहा जा रहा है, वह पाकिस्तान में दिखाया जा रहा है। ऑल पार्टी मीटिंग का प्रस्ताव पाकिस्तान रेडियो और पाकिस्तान टीवी पर हेडलाइन बनता है।'' वहीं, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने दिग्विजय से पूछा कि क्या राजीव गांधी की हत्या दुर्घटना थी या आतंकी हमला।
वायुसेना के शौर्य पर सबूत मांग रहे सिब्बल- प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने कहा, "कपिल सिब्बल का ट्वीट देख रहा था। ये 10 साल केंद्रीय मंत्री थे। नामी-गिरामी वकील हैं। लंदन में भारत की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। भारत की वायुसेना के शौर्य पर सबूत मांग रहे हैं। तीसरे चिदंबरम साहब हैं। 10 साल वह भी केंद्रीय मंत्री रहे हैं। निजी परेशानी में हैं तो उन्हें ज्यादा नहीं कहूंगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के वाइस एयरमार्शल ने हताहतों पर कुछ नहीं कहा। भारतीय अधिकारियों ने हताहतों की संख्या नहीं बताई। तो ढाई सौ लोगों का आंकड़ा कहां से आया। शहीदों के पिता कहते हैं कि एक बेटा और होगा तो हम सरहद पर भेजेंगे। और कपिल सिब्बल को भारत की शौर्य, वायुसेना पर विश्वास नहीं है।''
'हमारी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न'
दिग्विजय ने ट्वीट किया, ''एयर स्ट्राइक पर विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।'' पहले उन्होंने ने कहा था कि तकनीक के दौर में किसी कार्रवाई की तस्वीरें सैटेलाइट से मिल सकती हैं। लिहाजा सरकार को सबूत देना चाहिए। अमेरिका ने लादेन को मारने का सबूत पेश किया था।
मंगलवार को सिंह ने ट्वीट में लिखा, ''प्रधानमंत्री जी आपकी सरकार के कुछ मंत्री कहते हैं 300 आतंकवादी मारे गए, भाजपा अध्यक्ष कहते हैं 250 मारे हैं। योगी आदित्यनाथ कहते हैं 400 मारे गए और आपके मंत्री एएस अहलुवालिया कहते हैं कि एक भी नहीं मरा। आप इस पर मौन हैं। देश जानना चाहता है कि इनमें झूठा कौन है।''
'250 लोग सिर्फ बालाकोट में मरे'
सिंह ने कहा, "एयर स्ट्राइक में हमारी तरफ से 250 मौतों की बात कही जा रही है, वे सिर्फ बालाकोट में ही मारे गए। इसमें कहीं और के आंकड़े शामिल नहीं हैं। टारगेट का चुनाव सावधानी से किया गया था ताकि सिविलियंस की जान न जाए।"
वहीं मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "कांग्रेस को हो क्या गया है। देश की जनभावना से एकदम उल्टी बात करते हैं। सेना की जानकारी को झुठला रहे हैं। ऐसा किसी और लोकतंत्र देश में नहीं होता, जहां सेना पर ही अविश्वास किया जाता हो।"
कितने मरे गिनती करना सरकार का काम: धनोआ
वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने सोमवार को कहा था कि अगर भारत ने जंगलों ने बम गिराए तो पाक की तरफ से हमला क्यों किया गया? हमले में कितने लोग मारे गए, यह पता करना वायुसेना का काम नहीं। यह सरकार काम है। हमने अपने लक्ष्य पर निशाना साधा। हमने मारे गए लोगों की नहीं बल्कि कितने निशाने लगाए, इसकी गिनती की।
अभिनंदन की रिहाई पर पाक सरकार को शुक्रिया कहा
विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की रिहाई के लिए दिग्विजय ने रविवार को पाक सरकार का शुक्रिया अदा किया था। उन्होंने कहा कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने अभिनंदन की रिहाई का फैसला करके दिखाया कि वे एक अच्छे पड़ोसी हैं। अब उन्हें (इमरान) आतंकी हाफिज सईद और मसूद अजहर को हमें सौंपकर बहादुरी दिखानी चाहिए। मोदी ने कन्याकुमारी में कहा था कि 26/11 के मुंबई हमले (2008) के बाद वायुसेना पाक में सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहती थी लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने ऐसा करने से रोक दिया था। इस पर दिग्विजय ने कहा, "मैंने मोदी जैसा झूठा व्यक्ति नहीं देखा।"
वायुसेना ने जैश के आतंकी कैम्प तबाह किए थे
पुलवामा हमले के 13वें दिन वायुसेना के मिराज-2000 विमानों ने बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी में जैश-ए-मोहम्मद के कैम्प तबाह किए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्रवाई में 350 आतंकी मारे गए थे। इसके अगले दिन 27 फरवरी को पाक के विमान भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में मिग-21 ने पाक के एफ-16 को मार गिराया था। पायलट अभिनंदन को पाक सेना ने बंदी बना लिया था।
स्ट्राइक से पहले कैम्प में 300 मोबाइल एक्टिव थे
न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, बालाकोट में एयर स्ट्राइक से पहले जैश के ठिकाने पर 300 मोबाइल फोन एक्टिव थे। इसकी जानकारी नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने सेना को दी थी। इस पर सुरक्षा एजेंसियों ने भी सहमति जताई थी। इस बात के साफ संकेत मिले थे कि कैम्प में करीब 300 लोग मौजूद हैं।
जैश के मदरसे की 4 इमारतों को निशाना बनाया था
मीडिया रिपोर्ट में एक अफसर ने कहा था- "इंटेलिजेंस एजेंसियों के पास सिंथेटिक एपरचर रडार (एसएआर) की तस्वीरें हैं। इसमें दिखाया गया है कि 4 इमारतों को निशाना बनाया गया। मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने पांच एस-2000 प्रीसीशन-गाइडेड म्यूनिशन (पीजीएम) दागे।" पीजीएम एक स्मार्ट बम होता है जो खास निशाने पर दागा जाता है। भारत ने पीजीएम इजरायल से लिए थे।
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