Tuesday, November 20, 2018

अमेरिका में गैरकानूनी प्रवासियों को पनाह नहीं देने का ट्रम्प का फैसला कोर्ट ने पलटा

गैरकानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले मैक्सिकन प्रवासियों को पनाह न देने के राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले पर एक जज ने सोमवार को अस्थायी रोक लगा दी। अदालत का यह फैसला ट्रम्प की इमिग्रेशन पॉलिसी की हार माना जा रहा है।

न्याय विभाग ने कोई टिप्पणी नहीं की
सैन फ्रैंसिस्को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जॉन टिगर ने आश्रय नियमों के खिलाफ जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू करने की बात कही। इस मामले में अगली सुनवाई 19 दिसंबर को होगी। अदालत के आदेश पर अमेरिकी न्याय विभाग ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका में सिर्फ उन्हीं प्रवासियों को पनाह मिलेगी, जो कानूनी तरीके से देश में दाखिल हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने 9 नवंबर के ट्रम्प के इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान जज टाइगर ने कांग्रेस को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर प्रवासी अमेरिका में आश्रय के लिए आवेदन कर सकता है। चाहे वह देश में किसी भी तरीके से क्यों न आया हो। जज ने कहा कि राष्ट्रपति इमिग्रेशन कानून में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकते हैं। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने टाइगर को जज नियुक्त किया था।

आश्रय संबंधी नियमों पर विवाद उस वक्त शुरू हुआ था, जब मध्य अमेरिका में रहने वाले हजारों लोग हिंसा और गरीबी से बचने के लिए अमेरिकी सीमा तक पहुंच गए थे। इनमें काफी बच्चे भी थे। इनमें से कुछ कैलिफोर्निया की सीमा से सटे मैक्सिकन शहर तिजुआना तक पहुंच गए थे।

मानवाधिकार संगठनों ने बताया कि आश्रय संबंधी नियमों को पूरा करने के लिए प्रवासियों को सीमा पर कई दिनों और हफ्तों तक इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि आश्रय संबंधी प्रक्रिया को काफी धीमी गति से निपटाने के लिए अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन अटॉर्नी ली गेलर्न्ट ने आदेश दिया कि इमिग्रेशन और नैशनैलिटी एक्ट के तहत कोई भी व्यक्ति अमेरिका में शरण के लिए आवेदन कर सकता है।

Friday, November 2, 2018

क्या विराट ने धोनी के 'संन्यास' का ऐलान कर दिया है?

भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली ने महेंद्र सिंह धोनी को आगामी टी-20 सिरीज़ से बाहर किए जाने पर सफाई दी है.

उन्होंने कहा है कि धोनी ने नौजवान विकेटकीपर बल्लेबाज़ टी-20 मैचों में ऋषभ पंत के लिए जगह बनाने के लिए न खेलने का फैसला किया है.

कोहली के इस बयान ने उस बड़े सवाल को फिर हवा दे दी है कि क्या धोनी ने अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैचों को अलविदा कह दिया है?

मैं उस बातचीत का हिस्सा नहीं था: कोहली
वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया के साथ आगामी टी-20 सिरीज़ के लिए घोषित भारतीय टीम में महेंद्र सिंह धोनी को शामिल नहीं किया गया था.

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ तिरुवनंतपुरम में खेले गए सिरीज़ के आख़िरी मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब विराट कोहली से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "अगर मैं ग़लत नहीं हूं तो मुझे लगता है कि चयनकर्ता इस पर पहले ही बात कर चुके हैं. और उनसे (धोनी से) भी बात की गई है. इसलिए मैं कोई कारण नहीं देखता कि जो कुछ हुआ, उस पर मैं यहां बैठकर सफ़ाई दूं

"चयनकर्ताओं ने बताया है कि क्या हुआ है. मैं उस बातचीत का हिस्सा नहीं था. मुझे लगता है कि लोग इस स्थिति के बारे में बहुत कयास लगा रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वो अब भी टीम का अहम हिस्सा हैं. उन्हें बस लगता है कि टी-20 फॉर्मेट में ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी को और मौक़े मिलने चाहिए."

कप्तान विराट कोहली ने कहा, "वो वैसे भी हमारे लिए नियमित तौर पर वनडे खेलते हैं. वो बस टी-20 में नौजवान खिलाड़ियों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं."

विराट कोहली के बयान से लगता है कि महेंद्र सिंह धोनी ने ही ख़ुद टी-20 टीम से बाहर होने का फैसला किया है. लेकिन सवाल ये है कि अगर वह ऋषभ पंत के लिए जगह बनाना चाहते हैं तो क्या वे टी-20 फॉर्मेट में कभी नहीं लौटेंगे?

वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली और प्रदीप मैगज़ीन दोनों को लगता है कि धोनी अब संभवत: टी-20 मैचों में कभी दिखाई नहीं देंगे.

विजय लोकपल्ली कहते हैं, "पहले चयनकर्ताओं ने संकेत दिए थे और अब कोहली ने सार्वजनिक तौर पर कह दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि चयनकर्ताओं ने इस बारे में धोनी से बात भी की. मुझे लगता है कि ये एक अच्छा निर्णय है."

"धोनी आख़िरी खिलाड़ी होंगे जो किसी की जगह रोकेंगे. आपको याद होगा कि जब उन्हें लगा कि वह टेस्ट क्रिकेट में रिद्धिमान साहा या पार्थिव पटेल की जगह रोक रहे हैं तो उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. इससे धोनी का किरदार पता लगता है."

ख़राब फॉर्म से जूझ रहे पूर्व कप्तान
विजय लोकपल्ली मानते हैं कि धोनी ने भारतीय क्रिकेट के हित में ही यह फैसला लिया है क्योंकि उन्होंने चयनकर्ताओं को एक नया विकेटकीपर तैयार करने का समय दे दिया है.

महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में ही भारत ने 2007 में पहला टी-20 विश्व कप जीतकर दुनिया को चौंका दिया था. जानकार मानते हैं कि इस बड़ी जीत के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को एक नई ताक़त मिली.

धोनी परिस्थिति के मुताबिक अपना खेल बदलने और बेहतरीन फिनिशर के तौर पर जाने जाते रहे हैं. 93 टी-20 मैचों में उनके नाम 37.17 की औसत से 1487 रन हैं. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 127 से ज़्यादा रहा है और निचले क्रम पर बल्लेबाज़ी करने के बावजूद वह भारत की ओर से सबसे ज़्यादा टी-20 रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में चौथे नंबर पर हैं.

धोनी ने अपना आख़िरी टी-20 मुकाबला 8 जुलाई 2018 को ब्रिस्टल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला था, हालाँकि उन्हें बल्लेबाज़ी करने का मौका नहीं मिला था.

धोनी बीते कुछ समय से ख़राब फॉर्म से जूझ रहे हैं और इस वजह से उन्हें आलोचनाओं का सामना भी कर रहे हैं.