गैरकानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले मैक्सिकन प्रवासियों को पनाह न देने के राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले पर एक जज ने सोमवार को अस्थायी रोक लगा दी। अदालत का यह फैसला ट्रम्प की इमिग्रेशन पॉलिसी की हार माना जा रहा है।
न्याय विभाग ने कोई टिप्पणी नहीं की
सैन फ्रैंसिस्को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जॉन टिगर ने आश्रय नियमों के खिलाफ जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू करने की बात कही। इस मामले में अगली सुनवाई 19 दिसंबर को होगी। अदालत के आदेश पर अमेरिकी न्याय विभाग ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका में सिर्फ उन्हीं प्रवासियों को पनाह मिलेगी, जो कानूनी तरीके से देश में दाखिल हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने 9 नवंबर के ट्रम्प के इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान जज टाइगर ने कांग्रेस को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर प्रवासी अमेरिका में आश्रय के लिए आवेदन कर सकता है। चाहे वह देश में किसी भी तरीके से क्यों न आया हो। जज ने कहा कि राष्ट्रपति इमिग्रेशन कानून में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकते हैं। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने टाइगर को जज नियुक्त किया था।
आश्रय संबंधी नियमों पर विवाद उस वक्त शुरू हुआ था, जब मध्य अमेरिका में रहने वाले हजारों लोग हिंसा और गरीबी से बचने के लिए अमेरिकी सीमा तक पहुंच गए थे। इनमें काफी बच्चे भी थे। इनमें से कुछ कैलिफोर्निया की सीमा से सटे मैक्सिकन शहर तिजुआना तक पहुंच गए थे।
मानवाधिकार संगठनों ने बताया कि आश्रय संबंधी नियमों को पूरा करने के लिए प्रवासियों को सीमा पर कई दिनों और हफ्तों तक इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि आश्रय संबंधी प्रक्रिया को काफी धीमी गति से निपटाने के लिए अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन अटॉर्नी ली गेलर्न्ट ने आदेश दिया कि इमिग्रेशन और नैशनैलिटी एक्ट के तहत कोई भी व्यक्ति अमेरिका में शरण के लिए आवेदन कर सकता है।
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