लोकसभा में यूं तो भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधित्व आबादी के अनुपात के हिसाब से बहुत कम है लेकिन इस बार यानी 17वीं लोकसभा में पिछली लोकसभा के मुक़ाबले दो अधिक मुसलमान संसद पहुंचे हैं.
इस बार कुल 25 मुसलमान सांसद निर्वाचित हुए हैं जिनमें सबसे ज़्यादा छह उत्तर प्रदेश से हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में एक भी मुसलमान सांसद उत्तर प्रदेश से संसद नहीं पहुंचा था. उपचुनावों में कैराना से तबस्सुम हसन ने जीत हासिल करके संसद में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन वो इस बार चुनाव हार गई हैं.
उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज़्यादा पांच मुसलमान सांसद पश्चिम बंगाल से संसद पहुंच रहे हैं. इनमें से चार तृणमूल कांग्रेस से हैं और एक कांग्रेस पार्टी से. इसके अलावा केरल और जम्मू और कश्मीर से तीन-तीन मुसलमान सांसद चुने गए हैं.
वहीं असम और बिहार से भी दो-दो मुसलमान संसद पहुचंगे. इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पंजाब से एक-एक मुसलमान सांसद निर्वाचित हुए हैं.
चर्चित सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी सीट हैदराबाद से एक बार फिर जीत हासिल की है. वहीं मुस्लिम बहुल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप से इस बार नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के टिकट से मोहम्मद फ़ैज़ल पीपी चुने गए हैं.
उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के चर्चित नेता आज़म ख़ान रामपुर से जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं और अब वो संसद में मुसलमानों की आवाज़ मज़बूत करेंगे.
बीजेपी ने इस बार छह मुसलमानों को अपना उम्मीदवार बनाया था लेकिन इनमें से एक भी नहीं जीत सका है.
सत्ताधारी गठबंधन में सिर्फ़ एक मुसलमान सांसद लोकजनशक्ति पार्टी की ओर से चौधरी महबूब अली कैसर होंगे.
भारतीय संसद में सबसे ज़्यादा मुसलमान सांसद 1980 में चुने गए थे. इस साल 49 मुसलमान चुनकर संसद पहुंचे थे.
वहीं 1984 के चुनावों में भी 45 मुसलमान सांसद चुने गए थे. आज़ाद भारत में जब पहली बार 1952 में चुनाव हुए तो 25 मुसलमान संसद पहुंचे थे.
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