संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 20 महिलाओं या लड़कियों में से कम से कम एक शख़्स के साथ किसी न किसी प्रकार के फ़ीमेल जेनिटल म्युटिलेशन (एफ़जीएम) यानी महिला ख़तना हुआ होता है.
दुनिया में इस समय 20 करोड़ ऐसी महिलाएं हैं जिनके गुप्तांग को किसी न किसी प्रकार काटा गया है या हटाया गया है.
महिलाओं में ख़तने (एफ़जीएम) को पूरी तरह रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा की है जो हर साल छह फ़रवरी को होता है.
महिलाओं और लड़कियों के गुप्तांगों को बचपन में या फिर किशोर अवस्था में ही काट दिया जाता है.
ख़तने के कारण शारीरिक और मानसिक दिक़्क़तें होती हैं जो अक्सर पूरी ज़िंदगी भर चलती है.
कीनिया की इसियोलो काउंटी के बोराना समुदाय से आने वालीं बिशारा शेख हामो कहती हैं, "जब मैं 11 साल की थी तब मेरा ख़तना हुआ था."
"मेरी दादी ने बताया कि यह ख़तना हर लड़की की ज़रूरत है जो उसे पवित्र करता है."
लेकिन बिशारा को यह नहीं बताया गया कि इससे उन्हें अनियमित माहवारी, जीवन भर मूत्राशय की समस्याएं, कई प्रकार के संक्रमण होंगे. इसके अलावा वह केवल ऑपरेशन के ज़रिए ही बच्चे को जन्म दे पाएंगी.
फ़ीमेल जेनिटल म्युटिलेशन या एफ़जीएम यानी ख़तना ऐसी एक प्रक्रिया है जिसमें जानबूझकर महिला के बाहरी गुप्तांग को काट दिया दिया जाता है या उसे हटा दिया जाता है.
इसमें अक्सर महिला गुप्तांग की मुड़ी हुई त्वचा (लेबिया) और क्लाइटोरिस को हटाया या काट दिया जाता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो बिना मेडिकल कारणों के महिला गुप्तांग को नुकसान पहुंचाती है वह इस श्रेणी में आती है.
एफ़जीएम महिलाओं और लड़कियों को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से नुक़सान पहुंचाता है और इस प्रथा के कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं हैं.
यह बहुत ही विचलित करने वाला है और महिलाओं के संबंधों को नुकसान पहुंचाता है. यह अक्सर महिलाओं की इच्छा के ख़िलाफ़ होता है या उन पर थोपा जाता है.
मिस्र की फ़िल्म निर्माता और ब्लॉगर ओमनिया इब्राहीम कहती हैं, "आप एक बर्फ़ के टुकड़े की तरह हैं. आप कुछ नहीं महसूस करती हैं, आप प्रेम नहीं करती हैं और आपकी कोई इच्छा नहीं होती है."
ओमनिया अपने पूरे व्यस्क जीवन में ख़तने के मनोवैज्ञानिक प्रभावों से जूझती आईं.
वह कहती हैं, "मैं अपनी यौन इच्छा की सोच से जूझती रही हूं, मुझे यह कैसे पता चलेगी? मैं हमेशा ख़ुद से पूछती थी, क्या मैं सेक्स से नफ़रत करती हूं क्योंकि मुझे इससे डरना सिखाया गया था या क्या मुझे वास्तव में इसकी कोई परवाह नहीं है?"
कीनिया में बिशारा का चार अन्य लड़कियों के साथ किस तरह ख़तना किया गया इसके बारे में वह बीबीसी को बताती हैं, "मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी. इसके बाद उन्होंने मेरे हाथ पीछे की ओर बांध दिए. मेरी टांगें खोल दी गईं और इसके बाद उन्होंने मेरे जननांग की बाहरी परत को नीचे की ओर खींच दिया."
"कुछ मिनटों बाद मैंने तेज़ दर्द महसूस किया. मैं चीखी-चिल्लाई लेकिन किसी ने मुझे नहीं सुना. मैंने ख़ुद को छुड़ाने के लिए लात मारी लेकिन मेरी टांगें मज़बूती से पकड़ी गई थीं."
वह कहती हैं कि यह बहुत 'दर्दनाक' थी. उन्होंने इसी तरह से सभी लड़कियों के साथ ऐसा किया.
वह कहती हैं कि दर्द रोकने के लिए केवल कुछ पारंपरिक देसी दवाएं थीं.
"ज़मीन पर एक गड्ढा था जिसमें एक प्रकार की जड़ी-बूटी होती थी. उन्होंने बकरियों की तरह मेरे पैर बांधे और वह जड़ी-बूटी रगड़ दी. इसके बाद उन्होंने कहा, अगली लड़की फिर वह एक के बाद अन्य लड़कियों के साथ यह करते गए."
एफ़जीएम कई देशों में ग़ैर-क़ानूनी है. हालांकि, अफ़्रीका, एशिया और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में यह प्रथा जारी है और साथ ही उन देशों में भी जहां एफ़जीएम अपनाने वाले देशों के लोग रहते हैं."
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