Sunday, December 16, 2018

राहुल गांधी की इमेज बीते 5 दिनों में कितनी बदल गई

रविवार शाम को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का नाम सामने आते ही 11 दिसंबर को आए चुनावी नतीजों के बाद से शुरू हुआ राहुल गांधी का 'मिशन सेमीफ़ाइनल' पूरा हो गया है.

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ताक़त के लिहाज से अपेक्षाकृत मज़बूत माने जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बीजेपी के हाथों से छीन लिया है.

इन राज्यों में चुनावी जीत के बाद से राहुल गांधी अचानक से 2019 के आम चुनावों के लिहाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की स्थिति में खड़े दिखाई दे रहे हैं. और इस मौके का राहुल गांधी ने अपनी छवि को चमकाने के लिए भरपूर इस्तेमाल भी किया है.

जीत के बाद की प्रेस कांफ्रेंस
सबसे पहले बात चुनावी नतीजे के बाद उनकी प्रेस कांफ्रेंस की. मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर के चलते राहुल गांधी को इसे तीन चार घंटे भले टालना पड़ा हो लेकिन जब वे पहुंचे तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था.

उन्होंने ना केवल ये कहा कि वे 2019 में नरेंद्र मोदी को हराएंगे लेकिन हम किसी को भारत से मुक्त नहीं करना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से ये भी सीखा है कि उन्हें क्या क्या नहीं करना है.

ज़ाहिर है राहुल जीत के बाद से अपनी पॉश्चरिंग करने में लग गए थे. वे ये दर्शा रहे थे कि वे और उनकी पार्टी पॉजिटिव राजनीति को आगे बढ़ाने का काम करेंगे.

उनकी इस बॉडी लैंग्वेज पर ब्रैंड कंसल्टेंट हरीश बिजूर ने बीबीसी से कहा, "उन्होंने जीत को गरिमा के साथ स्वीकार किया, उनके अंदाज़ में एक ठहराव था, समग्रता की बात थी, अकड़ नहीं थी और परिपक्वता साफ़ झलक रही थी."

लेकिन अगले दिन मीडिया में ख़बरें आने लगीं कि चुनाव तो जीत गए हैं, लेकिन राहुल गांधी मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं कर पा रहे हैं. बुधवार का दिन मुख्यमंत्री के नामों के एलान की घोषणा के इंतज़ार में ही बीता.

मुख्यमंत्री के नाम पर घमासान
मध्य प्रदेश से ख़बरें आने लगी कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में घमासान छिड़ा है और राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत आमने सामने हैं. छत्तीसगढ़ की जीत भले जोरदार रही हो लेकिन संदेह वहां भी बना हुआ था, भूपेश बघेल के साथ टीएस सिंह देव और ताम्रध्वज साहू के नाम रेस में आ गए थे.

इसके बाद मीडिया के लोगों के सामने राहुल गांधी दिखे. पहले से ज्यादा सहज मुस्कुराते हुए कहा कि अलग अलग जगहों से इनपुट ले रहे हैं, विधायकों से बात कर रहे हैं और भी लोगों से बात कर रहे हैं, जल्दी ही नाम का एलान हो जाएगा.

इस बीच छत्तीसगढ़ के कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के पास राहुल गांधी के रिकार्डेड मैसेज आने लगे कि आपकी नजर में किन्हें होना चाहिए मुख्यमंत्री.

राहुल गांधी अब नेशनल मीडिया की ख़बरों के केंद्र में आ गए थे. उनकी पीआर मशीनरी इस खेल को ख़ूब समझ रही थी और उन्होंने ख़बरों की दुनिया को राहुल गांधी की बैठकों के इर्द-गिर्द उलझाए रखा.

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